किडनी रोग चुपचाप बढ़ता है — जानिए वे संकेत जिन्हें जल्दी पहचानकर किडनी बचाई जा सकती है।
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किडनी रोग के शुरुआती लक्षण बहुत हल्के होते हैं और अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाते हैं: थकान, पैरों/आंखों में सूजन, रात में बार-बार पेशाब, झागदार पेशाब, और भूख कम लगना। सबसे ज़रूरी बात: ब्लड और पेशाब की जांच (eGFR + UACR) ही सही पहचान है — लक्षणों का इंतज़ार न करें।
किडनी अपनी क्षमता का 70-80% खो देने तक अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं देती। इसीलिए भारत में ज़्यादातर किडनी रोग के मामले देर से (स्टेज 4-5) पकड़े जाते हैं, जब डायलिसिस अनिवार्य हो जाता है।
जोखिम वाले लोगों (मधुमेह, उच्च रक्तचाप, किडनी रोग का पारिवारिक इतिहास) के लिए सालाना जांच ही एकमात्र विश्वसनीय तरीका है।
1) थकान और कमज़ोरी (एनीमिया का संकेत), 2) टखनों/आंखों में सूजन (तरल जमा होना), 3) रात में बार-बार पेशाब, 4) झागदार/खूनी पेशाब (प्रोटीन/क्षति), 5) भूख न लगना और मतली, 6) लगातार खुजली, 7) सांस फूलना (तरल की अधिकता)।
ये लक्षण किडनी रोग के बिना भी हो सकते हैं — लेकिन जोखिम वाले लोगों में इनका मतलब जांच कराना है।
दो जांचें पर्याप्त हैं: (1) खून में क्रिएटिनिन → eGFR (किडनी कितना छानती है), (2) पेशाब में एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन अनुपात (UACR) — किडनी की क्षति का सबसे शुरुआती संकेत।
ये दोनों सस्ती और आम जांच हैं। 3 महीने से ज़्यादा असामान्य रहने पर CKD का निदान होता है।
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This content is a general reference, not medical advice, a diagnosis, or a treatment plan. Do not change your diet, fluids, medicines, or dialysis plan without your nephrologist or renal dietitian. Individual recommendations depend on your labs, medications, conditions, and care plan.